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किताबों में भूमिका का क्या योगदान है? अपनी पुस्तक की भूमिका कैसे लिखें?

अगर आप कोई किताब प्रकाशित करवाना चाहते हैं. तो सबसे पहले आपको हम यह बता दें कि आपकी किताब लिखने में तथा लोगों के समक्ष उसे प्रदर्शित करने में सबसे अहम स्थान उस भूमिका की होती है जो कि उस किताब में होनी चाहिए। जहां आप की कहानी, उपन्यास या कविता का एक छोटा सा अंश लिखा जाता है और उस भूमिका में ऐसी कोई बात होती है जिसे पढ़ कर पाठक को ऐसा लगता है कि वह किताब उसे जरूर पढ़नी चाहिए। हमारे इस ब्लॉग में हम जानेंगे की किताबों में भूमिका का क्या योगदान है और अपनी पुस्तक की भूमिका कैसे लिखें?

किताबों की भूमिका किसे कहते हैं?

कोई भी किताब लिखने से पहले लेखक को इस बात का ध्यान देना होता है कि उसे किताब की भूमिका बहुत ही मजबूत होनी चाहिए। इसके लिए सबसे पहले हमें यह जानना जरूरी है कि आखिर भूमिका कहते किसे हैं?

तो दोस्तों हम आपको बता दे कि “लेखक द्वारा उसकी संपूर्ण किताब के विषय में एक छोटा सा लिखा गया परिचय जिसमें कि उसे किताब का जिसकी भूमिका हम लिख रहे हैं फिर वह कहानी है या उपन्यास है या कविता है कुछ भी है उसका एक छोटा सा अंश जो कि उसे किताब का सबसे मजबूत हिस्सा हो जिससे कि पाठक उसे किताब को पढ़ने के लिए और भी अधिक आकर्षित हो इसके लिए जाए लिखा जाता है, और संपूर्ण भूमिका में लेखक इस प्रकार से उसकी तप की भूमिका लिखता है या किताब का परिचय लिखता है जिससे कि यह समझ में आता है कि लेखक अपनी पाठकों से उनके सम्मुख बैठकर बात कर रहा है। जिसके लिए वह अपने संपूर्ण भूमिका में कई जगहों पर मेरे प्रिय पाठकों,पाठकों जैसे शब्दों को दोहराता है। जिससे कि किताब को पढ़ने वाले पाठकों को यह समझ में आता है कि उसे किताब में पाठकों के लिए विशेष सम्मान है। इन सभी बातों को ध्यान में रखकर लिखा गया किताब का सबसे पहला पन्ना ही भूमिका कहलाता है।,,

अपनी किताब की भूमिका कैसे लिखें?(How to write the introduction of your book?)

किसी भी किताब को लिखने से पहले सबसे पहले ध्यान देने योग्य यह बात होती है कि उसे किताब की भूमिका कैसी है? और इसीलिए हर लेखक को अपनी किताब लिखने से पहले यह बात समझनी चाहिए कि आखिर भूमिका लिखी कैससे जाती है? तो दोस्तों हम अपने इस लेख में आपको यह बताने वाले हैं कि आप अपने किताब की भूमिका आखिर किस प्रकार से लिखें जिससे कि आपकी किताब और भी अधिक आकर्षक बन जाए।

1-भूमिका आपकी किताब लिखने के बाद लिखें (Write the introduction after writing your book)

किसी भी लेखक को अपनी भूमिका तभी लिखनी चाहिए जब उसके द्वारा लिखी जा रही पुस्तक पूरी हो चुकी हो। फिर वह कोई कहानी हो, उपन्यास हो या फिर कविताओं की किताब हो। क्योंकि भूमिका आपकी पूरी किताब का मूल्यांकन करती है। इसलिए अपनी भूमिका तभी लिखिए जब आपकी किताब लिखकर पूरी हो चुकी हो। जिससे कि आप लोगों को यह स्पष्ट कर सके कि आखिर किस टॉपिक पर आपने यह किताब लिखी है।

2-भूमिका में अपने क़िताब का एक अंश साझा कीजिए (Share an excerpt from your book in the introduction)-

सबसे अच्छी भूमिका वही मानी जाती है जिसमें लेखक अपनी किताब का कोई एक अंश वहां साझा करता है। फिर वह अंश कोई छोटी सी कहानी हो सकती है, उपन्यास का अंश हो सकता है या कविताओं की पंक्तियां हो सकती हैं। और यहाँ वही अंश लिखिए जो कि आपकी किताब में सबसे अधिक लोगों को अपनी तरफ आकर्षित कर सकें। जिससे कि लोग आपकी किताब पढ़ने पर मजबूर हो जाएं।

3-भूमिका आपने लिखी क्यों है यह बताइए (tell why you have written the role)

आपने अपनी किताब में यह भूमिका क्यों लिखी है इसका कारण बताइए लोगों को। और यह कारण बताते हुए लोगों को समझाने की कोशिश कीजिए कि आपकी किताब का मूल विषय क्या है?

4-भूमिका में आभार व्यक्त कीजिए(express gratitude in the role)

भूमिका लिखते समय इस बात का ध्यान दीजिए कि आपको अपने पाठको के प्रति अपना आभार व्यक्त करना चाहिए। जिससे कि आपकी भूमिका को पढ़ते समय आपके पाठकों को यह लगे कि लेखक काफी विनम्र स्वभाव का है।और आपको यह बताते चलें कि आपकी किताब के मुख्य चरित्र आपके पाठक ही होते हैं इसलिए भी आपको उनका आभार व्यक्त करना चाहिए।

5-अपनी भूमिका में पाठकों से बात कीजिए (Talk to the readers in your role)

अपनी भूमिका लिखते समय आप ऐसा अभिव्यक्त कीजिए जैसे कि आप अपने पाठकों से बात कर रहे हैं। आपकी भूमिका में ऐसा प्रतीत होना चाहिए कि जैसे उस भूमिका में आप और आपके पाठक यह दोनों चरित्र बेहद ही विशेष हैं। इसीलिए भूमिका लिखते समय आप मेरे प्रिय पाठको जैसे शब्दों का उपयोग कीजिए।

तो दोस्तों हमें कमेंट में बताइएगा कि आपको हमारा यह लेख कैसा लगा? और ऐसे ही और आर्टिकल्स पढ़ने के लिए आप हमारी वेबसाइट के माध्यम से पढ़ सकते हैं।

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