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माँ पर हिंदी कविता (Hindi Poetry on Mother)

वो माँ है, वो सब कुछ जानती है।

वह धुन न  जग के किसी शहनाई में है

न किसी वादक की गिटार में है।

जो मेरे बचपन के पहले पग पर उत्साह भरने को,

मेरी मां के चुटकियों  की चटकार में है।

वो हमें हमारे जन्म से लेकर,

अपने जीवन के अंत तक ,

बड़े ही प्यार से पालती है।

वो मेरी माँ है , वो मेरा सब कुछ जानती हैं।।

वह जो मेरे चेहरे की रंगत देखकर

मेरे दर्द की गहराई तक को जान लेती है।

जो कुछ पल उसके साथ बैठु तो,

बिन बोले ही कारण तक पहचान लेती है।

हो मेरे दर्द पर मुझसे ज्यादा रोती है,

और मेरी खुशियों पर खुद को

खुशी से भी होती है।

मेरी पीड़ा पर विराम के खातिर,

वो हर मंदिर में झोली फैलाती है।

वो मेरी मां ही तो है, वो मेरा सब कुछ जानती है।

जिसके आंचल की छाया,

संसार के हर बहुमूल्य से धनी है।

जिसकी हाथ पर की गोदी,

सैकड़ों स्वर्ग से बनी है।

ये आंचल की बनी छाया है,

स्वर्ग से बड़ी गोदी,

मेरे जीवन में मुझे सबसे ज्यादा प्यारी है।

जो मेरे बेटे नहीं बल्कि,

बेटी होने पर गर्व से अपना सीना तानती है।

वो मेरी माँ ही तो है, वो मेरा सब कुछ जानती है।

श्वेता पाण्डेय।

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