पीयूष मिश्रा कौन हैं?
“आरंभ है प्रचंड बोले मस्तकों के झुंड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो
आन बान शान या की जान का हो दान
आज एक धनुष के वाण पर उतार दो,,,”
जैसी अमर कविता रचने वाले पीयूष मिश्रा जी का जन्म मध्य प्रदेश के ग्वालियर में 13 जनवरी सन 1963 में एक लोअर मिडल क्लास फैमिली में हुआ था।पीयूष मिश्रा एक जाने माने अभिनेता के साथ ही साथ एक अच्छे लिरिसिस्ट, स्क्रिप्ट राइटर, स्क्रीन राइटर, म्यूजिक कंपोजर और गायक भी हैं।
वैसे तो इन्होंने दिल्ली में रहते हुए भी कई सारे नामी गामी टीवी शो और फिल्मों के लिए काम किया लेकिन 2003 में इन्होंने फिल्म मकबूल में काम किया जहां से इन्हें नाम और शोहरत मिली। और फिर सन 2004 में आई उनकी फिल्म गुलाल ने तो इतिहास रच दिया। जहां उनके द्वारा लिखा गया गीत और गाया गया गाना “आरंभ है प्रचंड, ने इन्हे पूरे भारत में इनका एक अलग पहचान दिलाई। आज के समय में बच्चे बच्चे की जुबान पर यह गाना कभी न कभी आपको सुनने को मिल जाता है।
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पियूष मिश्रा का बचपन (Childhood of Piyush Mishra)
पीयूष मिश्रा के पिताजी व चाचा जी को उनकी बहन यानी कि पीयूष मिश्रा की बुआ अपने साथ ससुराल ले आयीं थीं या मान सकते हैं कि दहेज के तौर पर लाई थी। इस तरह से पीयूष मिश्रा के पिताजी अपनी बहन के ससुराल में ही रहते थे ग्वालियर में। और अपनी बहन के साथ आने के बाद इनका नाम प्रताप कुमार मिश्रा से प्रताप कुमार शर्मा हो गया। इनके पिता बेहद ही सरल स्वभाव के थे और माता तारा देवी मिश्रा जोकि देहाती थीं औऱ बहुत ही सीधी थीं। लेकिन पीयूष मिश्रा की बुआ की कोई औलाद नहीं थी इसीलिए उन्होंने पीयूष मिश्रा को गोद ले लिया लिखित तौर पर। और उनकी बुआ बहुत गुस्सैल स्वभाव की थीं पूरे परिवार पर उनका ही वर्चस्व चलता था। तो उन्हें कभी भी यह पसंद नहीं आता था कि पीयूष मिश्रा कभी भी अपने पिता को पिता नाम से संबोधित करें क्योंकि अब वो उनके बेटे थे इसीलिए पीयूष जी आजीवन अपने पिता को सर नाम से ही संबोधित करते रह गए। और उनकी बुआ का यही स्वभाव पीयूष मिश्रा को बिल्कुल भी पसंद नहीं आता था कि “जबरदस्ती किसी पर अपने विचारों को कोई क्यों थोपे?
इस वजह से वे आजीवन अपनी बुआ से नफरत करते रह गए।
पियूष मिश्रा का शुरूआती जीवन (Piyush Mishra’s early life)
पीयूष मिश्रा का स्वभाव बेहद ही गुस्सैल हो चुका था क्योंकि कभी भी उन्हें उनके मन मुताबिक काम करने का बचपन से ही मौका नहीं मिला था। वे मानते हैं कि वह कान्वेंट स्कूल के लायक नहीं थे लेकिन फिर भी उन्हें जबरदस्ती कॉन्वेंट स्कूल में डाला गया। इंटर तक की पढ़ाई इसी तरह से बेमन की चलती गई। लेकिन वें यह भी मानते हैं कि उनके पिता उनकी भविष्य को लेकर बेहद ही चिंतित थे और वह बहुत ही सरल स्वभाव के ईमानदार इंसान थे जो की ठेकेदारी से अपने घर का गुजारा भत्ता चलाया करते थे| तो वह चाहते थे कि पीयूष मिश्रा इस लायक हो जाए की कम से कम वह अपना परिवार चला सके। लेकिन पीयूष मिश्रा अपना एडमिशन NSD में करवाना चाहते थे तो उन्होंने अपने किसी दोस्त के कहने पर करवाया भी। लेकिन यहां से पास करना बेहद ही मुश्किल था फिर भी उन्होंने यह कारनामा कर दिखाया। इसके बाद उनके पिताजी इनसे बहुत खुश हुए थे। तभी उन्हें ऐसा लगने लगा कि कहीं ना कहीं उनके पिताजी भी नाटक और रंगमंच में काम करना चाहते थे जो कि वह नहीं कर पाए तो उन्हें अपने बेटे को रंगमंच पर देख कर खुशी मिली थी।
पियूष मिश्रा की शिक्षा (Education of Piyush Mishra)
अपनी इंटर तक की पड़ी उन्होंने कान्वेंट स्कूल से ही ग्वालियर में पूरी की है। इसके बाद इन्हें क्योंकि थिएटर और रंग मंच पर काम करने का बहुत शौक था तो अपने दोस्त के कहने पर इन्होंने NSD के लिए फॉर्म अप्लाई किया और फिर NSD में चुने जाने के बाद इन्होंने सन 1986 में दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा(NSD) से अपनी ग्रेजुएशन कंप्लीट किया। यहीं से इन्होंने अपने रंगमंच के जीवन की शुरुआत की है।
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पियूष मिश्रा की थियेटर लाइफ (Piyush Mishra’s theater life)
रंगमच पर काम करने के उद्देश्य से इन्होंने NSD का अपना कोर्स कंप्लीट किया। और फिर दिल्ली में सन 1983 से 2003 तक थिएटर में अपनी जिंदगी गुजार दी। क्योंकि थिएटर से ज्यादा पैसे नहीं मिलते थे तो इन्होंने अपना रुख T. V शो औऱ फिल्मों की ओर कर लिया और फिर कई सारे टीवी शो और फिल्मों में काम करना शुरू किया। जहां इन्होंने साल 1988 में पहला टीवी शो “भारत एक खोज,, से अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद इन्होंने सन 1993 में सरदार फिल्म बॉलीवुड में अपना पैर जमाया। इस तरह से इन्होंने कई सारी फिल्मों में काम करना शुरू किया लेकिन सन् 2003 के बाद ये अपनी 40 साल की उम्र में मुंबई परमानेंट रहने के लिए आ गए। जहां पर उनकी असल जिंदगी की शुरुआत हुई।
पियूष मिश्रा की फिल्मे और गाने (Piyush Mishra movies and songs)
क्योंकि पहले से ही बहुत सारे लोगों को फिल्म इंडस्ट्री में जानते थे इसीलिए इन्हें मुंबई आने के बाद ज्यादा संघर्ष करने की जरूरत नहीं पड़ी। इसीलिए इन्होंने सन 2003 में मकबूल फिल्म मुंबई आने के बाद की और 2004 में गुलाल फिल्म ने इन्हें नाम और शोहरत दोनों कमाने का मौका दिया। इसके बाद उनके पास फिल्मों की लाइन लगी थी जिनमें तमाशा, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर, गैंग्स ऑफ़ वासेपुर पार्ट 2, रिवॉल्वर रानी, लफंगे परिंदे जैसी कई सारी फिल्मों में काम करने का और गाने लिखने का मौका मिला।
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पियूष मिश्रा के विचार (Piyush Mishra’s thoughts)
पीयूष मिश्रा मानते हैं कि एक समय में वे ना चाहते हुए भी शराब की लत में ऐसे लगे कि वह खुद को उभार नहीं पाते थे। वे चाहते थे कि वह शराब न पिए लेकिन फिर भी वह उससे दूर नहीं रह पाते थे जिसके लिए इन्होंने काफी सारे प्रयास किया। लेकिन अंतत ऐसा भी करने में सफल रहे। और वे मानते हैं कि उनके अधिक शराब पीने की वजह से उनका व्यवहार बहुत बदल गया था जिसकी वजह से उनके आसपास के लोगों के साथ ही साथ उनकी पत्नी को भी काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा था। लेकिन उनका कहना है कि आज वो जिस भी मुकाम पर है उसमें उनकी पत्नी का बहुत अहम रोल है।
वह भगवत् गीता में बहुत अधिक विश्वास करते हैं। वह कहते हैं कि“एक बार किया गया कर्म बिना फल दिए कभी भी नष्ट नहीं हो सकता है।,,
ऐसी सोच को ही पढ़ कर हम समझ सकते हैं की पीयूष मिश्रा कितने आध्यात्मिक सोच के व्यक्ति हैं।
पीयूष मिश्रा का कहते हैं कि मुंबई में आकर उन्होंने बहुत कुछ पाया लेकिन वे मानते हैं कि“” मुंबई में सब कुछ है वह सोच भी है जिसमें लिखा जाता है लेकिन सोच में शहर की तरह प्रदूषण भी है, गांव की तरह स्वच्छ और शांत नहीं।
पीयूष मिश्रा का परिवार (Piyush Mishra’s family)
पीयूष मिश्रा की पत्नी का नाम प्रिया नारायण है जो की साउथ की है और वह एक आर्किटेक्चर हैं। इन्होंने सन 1995 में लव मैरिज की थी। इनके दो बेटे हैं जोश मिश्रा और जय मिश्रा।
पीयूष मिश्रा की किताबें (Books by Piyush Mishra)
पीयूष मिश्रा एक बहुत ही अच्छे लेखक हैं। और उन्होंने गानों के साथ एक साथ कई सारी किताबें भी लिखी है जिनमें तुम्हारी औकात क्या है पीयूष मिश्रा, कुछ इश्क किया कुछ काम किया, आरंभ है प्रचंड, जब शहर हमारा सोता है, तुम हमारी जान हो रजिया बी, सन 2025, गगन दमाना बाज्यो, वो अब भी पुकारता है, मेरे सच की सरगम जैसी ढ़ेरो किताबें लिखी हैं। जिन्हें आप अगर पढ़ना चाहते हैं तो अमेजॉन से ऑनलाइन खरीद सकते हैं। इसकी लिंक हमने नीचे दी है।
पीयूष मिश्रा का आरंभ है प्रचंड Lyrics (Piyush Mishra’s beginning is Prachanda Lyrics )
पीयूष मिश्रा की रचनाओं में सबसे अधिक जानी-मानी उनकी रचना है आरंभ है प्रचंड है। उनकी रचना को सन 2004 में गुलाल फिल्म में एक गीत के तौर पर गया गया था जिसके बाद यह गीत जन-जन की जुबान पर हमें सुनने को मिला। जिसकी लिरिक्स है –
“आरंभ है प्रचंड बोले मस्तकों के झुंड
आज जंग की घड़ी की तुम गुहार दो
आन बान शान या की जान का हो दान
आज एक धनुष के वाण पर उतार दो,,
मन करे सो प्राण दे, जो मन करे सो प्राण ले,
वही तो एक सर्वशक्तिमान है,
विश्व की पुकार है यह भागवत का सार है कि,
युद्ध ही तो वीर का प्रमाण है,
कौरवों की भीड़ हो या पांडवों का नीर हो
जो लड़ सका है वही तो महान है,
जीत की हवस नहीं किसी पर कोई बस नहीं
क्या जिंदगी है ठोकरो पर मार दो,
मौत अंत है नहीं तो मौत से भी क्यों डरे,
ये जाके आसमान में दहाड़ दो।।
तो दोस्तों इस तरह से पीयूष मिश्रा की जीवनी हमने आपको यहां पर बताई है हमें आशा है कि आपको यह सभी जानकारियां पसंद आएगी ऐसे ही और बातें जानने के लिए आप हमारी वेबसाइट को सब्सक्राइब कर सकते हैं।
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