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सावित्रीबाई फुले कौन थीं? उनका परिवार व उनके द्वारा किया गया सामाजिक कार्य

सावित्रीबाई फुले एक ऐसी सशक्त महिला थीं जोकि आज के वर्तमान समय में भी एक चर्चा का विषय हैं। दोस्तों हम अपने इस लेख में आपके समक्ष सावित्रीबाई फुले के जीवन से संबंधित वे तमाम बातें रखने वाले हैं जिनसे आप शायद अब तक अनभिज्ञ रहे होंगे। तो यदि आप सावित्रीबाई फुले के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे इस लेख पर अंत तक बनें रहिए।

सावित्रीबाई फुले कौन थीं?

सावित्रीबाई फुले एक ऐसी महान नारी थीं जिन्होंने भारत में नारीवादी आंदोलन की स्थापना की थी। सावित्रीबाई फुले एक कवयित्री, समाज सुधारक व भारत देश की प्रथम महिला शिक्षिका थीं।सावित्रीबाई फुले के अथक प्रयासों के माध्यम से ही भारत में स्त्रियों को दयनीय दशा से ऊपर उठाने का प्रयास किया गया जिसमें वह सक्षम, और सफल भी रहीं। और वह ऐसा करने में सफल इसलिए भी रही क्योंकि उनका सहयोग करने के लिए उनके पति ज्योतिबा फुले स्वयं खड़े थे। “”सावित्रीबाई फुले भारत देश की पहली महिला शिक्षिका थीं, जिन्होंने अपने पति ज्योतिबा फुले के सहयोग से महाराष्ट्र के पुणे में एक बालिका विद्यालय की स्थापना सन 1848 मे करके स्वयं शिक्षा देना शुरू किया था।,,

और ऐसा करने से उन्हें रोकने वाले बहुत सारे ऐसे सामाजिक लोग थे जिन्हें की ऐसा लगता था कि स्त्रियों की शिक्षा समाज के लिए सही नहीं है। स्त्रियों को शिक्षित करने के लिए सावित्रीबाई फुले अपने सहयोगी साथियों के साथ में घर-घर जाकर लड़कियों व बालिकाओं से यह आग्रह करती थी कि वह स्कूलों में आए और पढ़ें। क्योंकि सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिबा फुले यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि यदि देश को आगे बढ़ाना है तो सबसे पहले स्त्री का शिक्षित होना बेहद ही जरूरी है।

सावित्रीबाई फुले का जन्म कहां हुआ था? सावित्रीबाई फुले का परिवार?

सावित्रीबाई फुले का जन्म सन 1831 में 3 जनवरी को महाराष्ट्र के सतारा जिले के नए गांव में एक महाराष्ट्रीयन परिवार में हुआ था। सावित्रीबाई फुले की माता का नाम लक्ष्मी और पिताजी का नाम खंडोजी नैवेसे पाटिल था। जो की माली समुदाय के थे। सावित्रीबाई फुले के कुल तीन भाई बहन थे जिनमे वें तीसरे नंबर पर थीं।

 सावित्रीबाई फूले का ब्याह जब वे लगभग 9 साल की थी तभी ज्योतिबा फुले जो की 13 साल के थे उनसे हो गयी थी । लेकिन इन दोनों को कोई भी संतान नहीं थी।इसीलिए ऐसा माना जाता है कि इन लोगों ने बाद में एक विधवा ब्राह्मणी के बेटे को गोद ले लिया था।,,

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सावित्रीबाई फुले की मृत्यु कब हुई थी?

महाराष्ट्र राज्य में एक समय ऐसा भी था जब पूरा राज्य प्लेग नामक महामारी से ग्रसित हो चुका था। इसी समय सावित्रीबाई फुले भी लोगों की सहायता के लिए आगे आयीं और उनकी सहायता की वजह से कईयों की जान बचाई जा सकी लेकिन लोगों की मदद करते-करते वह भी इस प्लेग नामक महामारी की चपेट में आ चुकी थी जिसकी वजह से उनकी मृत्यु 10 मार्च 1897 में हो गई।

सावित्रीबाई फुले की शिक्षा?

सावित्रीबाई फुले जब ब्याह कर आई थीं तब तक वें शिक्षा से औपचारिक रूप से जुड़ी नहीं थीं लेकिन ब्याह होने के बाद उनके पति ज्योतिबा फुले ने उन्हें औपचारिक रूप से शिक्षित किया व उनकी प्राथमिक शिक्षा पूरी की। और उसी के बाद उनके पति के दोस्त सखाराम यशवंत ने सावित्रीबाई फुले को माध्यमिक शिक्षा की दिलवाई। इसके बाद सावित्रीबाई फुले स्वयं इतनी शिक्षित हो चुकी थी कि वह निरक्षित महिलाओं को मार्गदर्शन कर सकें। और इसीलिए उन्होंने अपने पति के साथ में मिलकर पुणे में भारत देश के प्रथम महिला विद्यालय की स्थापना सन 1848 में की।

सावित्रीबाई फुले एक तेज तर्राक महिला थीं जो की महिलाओं की मार्गदर्शन बनी और उन्हें शिक्षा देने का कार्य करने की दृष्टिकोण से विद्यालय में उपस्थित हुयीं। और इसीलिए ऐसा माना जाता है कि भारत में सबसे पहली महिला अध्यापिका सावित्रीबाई फुले ही रही हैं।

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सावित्रीबाई फुले ने समाज के लिए क्या किया था?

 सावित्रीबाई फुले ने समाज के लिए बहुत सारे कार्य किए हैं जो कि इस प्रकार से हैं कि –

1- सावित्रीबाई फुले एक कवयित्री, अध्यापिका, दार्शनिक व समाज सुधारक के रूप में जानी जाती हैं। सावित्रीबाई फुले ने दलित समाज व सामान्य महिलाओं की स्थिति को सुधारने के लिए कई ऐसे अथक प्रयास किए हैं जिसकी वजह से उनका नाम इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा गया है। ऐसा बताया जाता है कि जब सावित्रीबाई फुले बालिकाओं को पढ़ने के लिए विद्यालय जाया करती थी तब उन्हें रास्ते में बहुत सारे ऐसे दुर्जन व्यक्तियों द्वारा जिन्हें की यह कार्य बिल्कुल भी नहीं पसंद था कि बालिकाओं व स्त्रियों को शिक्षित किया जाए वे लोग उन पर कीचड़, पत्थर व खाद फेंकते थे। जिसकी वजह से सावित्रीबाई फुले की साड़ी गंदी हो जाया करती थी। और इसीलिए सावित्रीबाई फुले अपने साथ एक और साड़ी विद्यालय लेकर जाया करती थी।,,

 सावित्रीबाई फुले और उनके पति के अथक प्रयासों के द्वारा सन 1848 में एक महिला विद्यालय की स्थापना करने के बाद उन्होंने लगातार तीन और महिला विद्यालयों की स्थापना की।जिसकी वजह से उन्हें समाज से बहिष्कृत तक हो जाना पड़ा था। क्योंकि सावित्रीबाई फुले और उनके पति ज्योतिबा फुले अपने पिता के घर पर रहते थे लेकिन समाज में उन लोगों की अवहेलना होने के बाद कुछ लोगों ने ज्योतिबा फुले के पिता को धमकी तक दे दी थी कि या तो वह ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई को अपने घर से निकाल दे या तो फिर वह स्कूल बंद करवा दे। जिसकी वजह से ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले ने अपना घर छोड़कर अपनी किसी मित्र के घर में रहकर अपना स्कूल चलना शुरू किया।

2- समाज में विधवा महिलाओं वह उनके बच्चों को कहीं भी स्थान नहीं दिया जाता था,, जिसे देखते हुए सावित्रीबाई फुले ने एक ऐसे घर की स्थापना करवाई जहां पर कोई भी विधवा महिला आकर रह सकती थी तथा अपने बच्चों का लालन-पालन कर सकती थी या अगर उसे नहीं रहना होता था तो वह अपने बच्चों को छोड़कर जा भी सकती थी उसे घर पर,, जहां से उन अनाथ बच्चों की जिम्मेदारी ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले स्वयं लेते थे। सावित्रीबाई फुले ने यह कार्य इसलिए शुरू किया था क्योंकि समाज में भ्रूण हत्या अधिक मात्रा में हो रही थी।

3- दलित समाज की महिलाओं को वह लोगों को समझ में किसी भी प्रकार से शिक्षित होने से रोका जाता था,, तथा उन्हें समाज में बहुत सारे ऐसे स्थान थे जहां जाने से रोका जाता था इन्हीं मानसिकताओं को बदलते हुए सावित्रीबाई फुले ने बहुत सारे कार्य किए हैं।

4- उस समय में बहुत ही कम उम्र में लड़कियों की शादी हो जाती थी जिसकी वजह से अधिकतम बालिकाएं विधवा हो जाती थी जबकि उनकी उम्र बहुत ही कम होती थी तो इन समस्याओं के समाधान के लिए विधवा पुनर्विवाह का सहयोग करते हुए सावित्रीबाई फुले ने सती प्रथा का बहुत विरोध किया।

5- सावित्रीबाई और ज्योतिबा फुले के अथक प्रयासों से उनके बालिका विद्यालय में नामांकित बालिकाएं लगभग 150 थीं।

सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी कहां है?

सावित्रीबाई फूले यूनिवर्सिटी महाराष्ट्र राज्य के पूरे जिले में स्थित है। यह एक बहुत बड़ा विश्वविद्यालय है जो कि लगभग 400 एकड़ में फैला हुआ है। सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ यूनिवर्सिटी की स्थापना 10 फरवरी सन 1849 के लगभग में की गई थी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना 19वीं साड़ी में भारत के महान समाज सुधारक ज्योतिबा फुले व सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र में महिलाओं और दलित समुदाय की बालिकाओं के लिए किया गया था। जिसका नाम सन 2014 में 9 अगस्त को बदलकर पूणे विश्वविद्यालय से सावित्रीबाई फुले पूरे विश्वविद्यालय कर दिया गया। यह विश्वविद्यालय भारत में पहला ऐसा विद्यालय था जिसे देसी संचालित स्कूलों की तरह चलाया गया था। और इस विद्यालय में गणित तथा विज्ञान जैसे विषय भी पढ़ाये जाते थे।

सावित्रीबाई फुले जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?

सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी सन 1831 को महाराष्ट्र राज्य में हुआ था। इसीलिए हर साल 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती मनाई जाती है। चुकी सावित्रीबाई फुले भारत देश की प्रथम महिला अध्यापिका व समाज सुधारक थी इसीलिए उनकी इन प्रयासों व समाज के प्रति उनके दिए हुए सहयोगों को याद करने के लिए हर वर्ष 3 जनवरी को सावित्रीबाई फुले जयंती मनाई जाती है।

सावित्रीबाई फुले की फोटो –

savitribai phule photos
savitribai phule

तो दोस्तों हमें आशा है कि आपको सावित्रीबाई फुले के संबंध में वें तमाम जानकारियां हमारे इस लेख में मिल गई है जिन्हें आप जानना चाहते थे ऐसी ही और जानकारी को पढ़ने के लिए आप हमारे दूसरे लेख को भी पढ़ सकते हैं।

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