भारत में स्वयं प्रकाशन (Self publishing in India)
जब भी कोई लेखक अपनी कोई किताब लिखते हैं तो उन्हें इस बात की चिंता सताती है कि आखिर में वह अपने किताब का प्रकाशन किस तरह से करवायें जिससे कि लोगों के बीच में उन्हें उनकी पहचान मिल सके।दोस्तों हमने आपको पिछले लेख में अपने बताया था कि अपनी किताबें प्रकाशित करवाने के दो तरीके हैं एक पारंपरिक प्रशासन (Traditional Publishing in India) जिसके बारे में हमने आपको सविस्तार बताया है और एक है स्वयं प्रकाशन (self Publication) जिनके माध्यम से आप अपने किताबों को प्रकाशित करवा पाएंगे और लोगों के बीच में अपनी एक अलग लेखक वाली पहचान बना पाएंगे। तो आईए जानते हैं कि भारत में किस प्रकार से आप स्वयं प्रकाशन की सहायता से अपनी किताब को प्रकाशित करवा सकते हैं।
अपनी बुक का स्वयं प्रकाशन कैसे करें? (How to self publish a book)
अपनी किताबों को आप स्वयं प्रकाशन (self publication) केंद्र के माध्यम से प्रकाशित करने के लिए आप ऑनलाइन किसी भी अच्छे स्व प्रकाशनों के नाम सर्च करके उनके द्वारा अपनी किताबों को प्रकाशित करवा सकते हैं जिसके लिए आपको किसी भी एजेंट की आवश्यकता नहीं होती है आप सीधे-सीधे पब्लिकेशंस में बात करके अपने द्वारा लिखी गई किताब को प्रकाशन केंद्र में देकर प्रकाशित करवा सकते हैं। और वह भी बहुत ही आसानी से।
कुछ सेल्फ पब्लिशिंग फर्म और उनके वेबसाइट
- Evincepub Publishing: www.evincepub.com
- Astitva Prakashan: www.astitvaprakashan.com
- White Falcon Publishing: www.whitefalconpublishing.com
- Notionpress: www.notionpress.com
- Blue Rose Publishers: www.wbluerosepublishers.com
स्वयं प्रकाशन के फायदे (Benefits of self publishing)
स्वयं प्रकाशन (Self Publication)के बहुत सारे फायदे हैं जो कि इस प्रकार से हैं –
Copyright का अधिकार लेखक के पास होता है
स्वयं प्रकाशन(Self Publication) के माध्यम से आपको अपने कॉपीराइट्स का अधिकार खोना नहीं पड़ता है वह लेखक के पास ही होता है जबकि पारंपरिक प्रकाशन में अक्सर देखा जाता है कि कॉपीराइट्स का अधिकार पब्लिकेशन के पास चला जाता है। सेल्फ पब्लिकेशन में आपको यह सुविधा दी जाती है कि आपको अपने किताब के ऊपर पूरा-पूरा कॉपीराइट्स अधिकार रखने की स्वतंत्रता दी जाती है। जिससे कि आप अपने माध्यम से लिखी गई हर कविता,कहानी जो भी है उसे किसी भी प्रकार से भविष्य में बदल सकते हैं या दूसरे जगह अपने लेखन का उपयोग कर सकते हैं।
Cover editing के लिए स्वतंत्रता होती है
स्वयं प्रकाशन(Self Publication) में अक्सर देखा जाता है कि किताबों के कवर कों एडिटिंग की स्वतंत्रता आपको दी जाती है। आप जैसा भी चाहते हैं अपनी किताब के कवर को एडिट करवा सकते हैं या अपने हिसाब से आप खुद एडिट करके दे सकते हैं जिससे कि आपकी किताब बेहद आकर्षक बन जाए और लोगों के बीच में उसकी डिमांड उसके कवर से भी बढ़ जाए। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि अक्सर लोग किताबों के कवर को देखकर आकर्षित होते हैं फिर अंदर क्या है उसे बाद में पढ़ते हैं। सबसे पहले किताब का कवर क्या है इस बात पर ध्यान जाता है और किताब का प्रचार भी इस तरीके से अधिक होता है।
Royalty अच्छी मिलती है
स्वयं प्रकाशन(Self Publication) में आपको रॉयल्टी कम से कम 35% से 50% तक की दी जाती है। जो की बहुत है और यह आपको आजीवन मिलेगी जितनी आपकी किताबें बिकती है उस हिसाब से आपके किताब की रॉयल्टी आपको मिलती है। तो इस तरीके से देखा जाए तो आपकी किताबें आपको आजीवन कमाई का जरिया बनकर आपके सामने आती हैं।
किताब की MRP तय करने की स्वतंत्रता होती है
स्वयं प्रकाशन(Self Publication) में आप चाहे तो अपने किताबों की MRP यानी कि मूल्यों को निर्धारित करने की स्वतंत्रता रखते हैं। आप जितना भी चाहते हैं अपनी मेहनत और किताबों के पेज के हिसाब से अपनी किताब का मूल्य रख सकते हैं इसकी स्वतंत्रता आपको सेल्फ पब्लिकेशंस ही देते हैं।
Agent की आवश्यकता नहीं पड़ती
स्वयं प्रकाशन (Self Publication) में आपको किसी भी एजेंट की आवश्यकता नहीं पड़ती है आप चाहे तो किसी भी अच्छे सेल्फ पब्लिकेशंस को ऑनलाइन सर्च करके उनके पब्लिशर से डायरेक्ट बात करके अपनी किताबों को प्रकाशित करवा सकते हैं। जहां आपको अपनी किताबें प्रकाशित करवाने के लिए कुछ पैसे देने होते हैं। लेकिन यहां कम से कम आपको किसी एजेंट के माध्यम से इन पब्लिकेशन पर पहुंचने की जरूरत नहीं होती है। तो इस हिसाब से आप सीधे पब्लिशर से बात करके अपने मन मुताबिक अपनी किताब को प्रकाशित करवा पाते हैं।
समय की बचत
स्वयं प्रकाशन केंद्रों के माध्यम से आप अपने समय की बचत कर सकते हैं क्योंकि पारंपरिक प्रशासन के मुकाबले सेल्फ पब्लिशिंग के अंतर्गत आपको ज्यादा से ज्यादा एक महीने के अंदर आपकी किताब पब्लिश होकर आपके पास पहुंच जाती है। जबकी पारंपरिक प्रकाशन केंद्रों में कम से कम 4 से 5 महीने का समय लग जाता है।
पढ़ें: अपनी किताब कैसे प्रकाशित करें – किताब छपवाने की पूरी प्रक्रिया
स्व प्रकाशन की सीमाएं (Limitations of self publishing a book in india)
स्वयं प्रकाशन (Self Publication) केंद्रों के फायदे के साथ ही साथ कुछ सीमाएं भी है जिन्हें हमें जानना बेहद ही जरूरी है जो की इस प्रकार से हैं –
स्वयं प्रकाशन (self publication)केंद्रों में आपको हर तरह की किताबें पढ़ने को मिल जाती हैं जिससे कि आप यह तय नहीं कर पाते हैं कि कौन सी किताब किस स्तर (level) की है। जिससे कि इनमें प्रकाशित तो होने वाले किताबों की मांग कम होती है।
स्वयं प्रकाशन केंद्रों में सभी प्रकार की किताबें छपती है जिससे कि इस बात को निर्धारित करना बेहद ही मुश्किल हो जाता है कि कौन सी किताब सबसे अच्छी है और कौन सी किताब पढ़ने लायक नहीं है इसीलिए हमें खुद ही होता है करना पड़ता है कि कौन सी किताब पढ़नी चाहिए।
तो दोस्तों हमें आशा है कि आपको हमारी यह पोस्ट पसंद आई होगी ऐसी और जानकारी को पढ़ने के लिए आप हमारे दूसरे आर्टिकल्स को पढ़ सकते हैं धन्यवाद।
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