गोपालदास नीरज का जीवन परिचय

“स्वप्न झरे फूल से, मीत चुभे शूल से, लूट गए सिंगार सभी बाग के बबूल से, और हम खड़े-खड़े बहार देखते रहे, कारवां गुज़र गया, गुबार देखते रहे!”  गोपालदास नीरज…

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